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दिल्ली: गुरु नानक देव जी की जयंती आज, गुरुद्वारों में गूंज रहा वाहेगुरु, वाहेगुरु


<p style="text-align: justify;">दिल्ली: आज देशभर में गुरुनानक जयंती मनाई जा रही है. पिछले साल कोरोना महामारी की वजह से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरु नानक जयंती पर बड़े लेवल पर समागम नहीं हो पाया था. लेकिन इस साल कोरोना की लहर कमजोर पड़ने पर दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी राजधानी के सभी ऐतिहासिक गुरुद्वारों पर प्रकाश पर्व मना रही है.</p>
<p style="text-align: justify;">सभी गुरुद्वारे रोशनी से नहाए हुए नजर आ रहे हैं. गुरुद्वारों पर माथा टेकने के लिए सुबह से ही सिख श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है. वहीं कई प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया है.</p>
<p style="text-align: justify;">बता दें कि हर साल सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की जयंती को गुरु नानक जयंती के रूप में मनाया जाता है. गुरु नानक जयंती को प्रकाश उत्सव या गुरु पर्व के रूप में भी जाना जाता है, यह सिख समुदाय के लिए सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से एक होता है.</p>
<p style="text-align: justify;">[tw]https://twitter.com/ANI/status/1461351948720828424[/tw]</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इस साल गुरु नानक जी की </strong><strong>की 552वीं जयंती </strong><strong>मनाई जा रही है</strong></p>
<p style="text-align: justify;">प्रकाश पर्व पर, दुनिया भर के सिख गुरु नानक जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, जो 1469 में लाहौर (पाकिस्तान में) के पास राय भोई की तलवंडी, जिसे अब नानक साहिब के नाम से जाना जाता है, में पैदा हुए थे. &nbsp;इस वर्ष गुरु नानक जी की 552वीं जयंती समारोह मनाया जा रहा है. पारंपरिक बिक्रमी कैलेंडर के अनुसार, गुरु नानक का जन्म कार्तिक (कटक) पूर्णिमा (पूर्णमासी) को हुआ था. इस साल यह 19 नवंबर 2021 को पड़ रहा है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>गुरु नानक जयंती से दो दिन पहले</strong><strong> गुरुद्वारों में होता है अखंड पाठ</strong></p>
<p style="text-align: justify;">दिन की शुरुआत प्रभात फेरी या गुरुद्वारा में सुबह के जुलूस से होती है. गुरु नानक जयंती से दो दिन पहले, गुरुद्वारों में अखंड पाठ या गुरु ग्रंथ साहिब का 48 घंटे तक लगातार पाठ किया जाता है. गुरु नानक जयंती से एक दिन पहले, नागरकीर्तन नामक एक जुलूस का आयोजन किया जाता है जिसका नेतृत्व पंज प्यारे (पांच प्यारे) करते हैं. वे निशान साहिब (सिख ध्वज), और पालकी (पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब ले जाने वाली पालकी) ले जाते हैं. इस अनुष्ठान में सिख मार्शल आर्ट विशेषज्ञों द्वारा गतका प्रदर्शन भी शामिल है. नेताओं ने गुरु नानक के संदेश का प्रसार किया जबकि भक्त भजन गाते हैं.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>मुख्य दिन पर </strong><strong>उत्सव रात में गुरबानी के साथ समाप्त होता है</strong></p>
<p style="text-align: justify;">मुख्य दिन पर उत्सव अमृत वेला से शुरू होता है. प्रात:काल के भजनों का पाठ करने के बाद कथा और कीर्तन का वर्णन होता है. फिर, प्रार्थना के बाद, सिख लंगर या सामुदायिक भोजन के लिए एकत्र होते हैं. भोजन (लंगर) के बाद, कथा और कीर्तन का पाठ जारी रहता है, और उत्सव रात में गुरबानी के साथ समाप्त होता है.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>ये भी पढ़ें</strong></p>
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