States

27 साल बाद भी नहीं भरे हैं उत्तराखंड के जख्म, आज भी डराता है 2 अक्टूबर का वो काला दिन 

Uttarakhand Muzaffarnagar Rampur Tiraha Incident: 2 अक्टूबर 1994 को रामपुर तिराहे पर हुई राज्य आंदोलनकारियों पर बर्बरता की वो घटना आज भी दिल दहला देती है. 7 आंदोलनकारियों (Agitators) की शहादत से अलग राज्य उत्तराखंड (Uttarakhand) तो मिल गया, लेकिन राज्य आंदोलनकारियों के सपनों का उत्तराखंड आज तक नहीं बन पाया है. आज भी राज्य आंदोलनकारी अपने सपनों के उत्तराखंड के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. 2 अक्टूबर 1994 को आंदोलनकारियों के साथ मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर जो घटना (Muzaffarnagar Rampur Tiraha Incident) हुई 27 साल बाद भी इसके जख्म नहीं भर पाए हैं. पुलिस (Police) और आंदोलनकारियों के संघर्ष में 7 आंदोलनकारी शहीद हो गए थे.

संघर्ष में 7 आंदोलनकारी शहीद हो गए
कोदा-झंगोरा खाएंगे, उत्तराखंड बनाएंगे के नारे जोर-जोर से हवा में गूंज रहे थे. उत्तर प्रदेश से अलग राज्य की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करना तय हुआ था और हजारों की संख्या में राज्य आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकल पड़े थे, लेकिन मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर राज्य आंदोलनकारियों का मुकाबला पुलिस प्रशासन से हुआ. यहां जो हुआ उसे याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं. पुलिस द्वारा आंदोलनकारियों पर फायरिंग, लाठीचार्ज, पथराव हुआ. आंदोलनकारियों के लिए आज भी दुख इस बात का है कि राज्य बनने का सपना जरूर पूरा हो गया, लेकिन राज्य गठन से पूर्व जो सपने देखे थे वो आज भी सपने ही बने हैं.

ये हुए शहीद

– देहरादून – रविंद्र रावत 
– भालावाला– निवासी सतेंद्र चौहान
– बदरीपुर-गिरीश भदरी
– अजबपुर -राजेश लखेड़ा
– ऋषिकेश – सूर्यप्रकाश थपलियाल
– ऊखीमठ -अशोक कुमार
– भानियावाला – राजेश नेगी

मनाया जाता है काला दिवस 
हर साल 2 अक्टूबर के दिन उत्तराखंड में काला दिवस मनाया जाता है. बकायदा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रामपुर तिराहे पर जाकर इन शहीदों को श्रद्धांजलि देते हैं. शहीदों के सम्मान में राज्य के विकास के लिए कई घोषणाएं भी होती हैं, लेकिन आज भी उत्तराखंड के आंदोलनकारी अपने संघर्षों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं. इस बार भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुजफ्फरनगर रामपुर तिराहे पर जाकर आंदोलनकारियों के लिए कई घोषणाएं की हैं. सीएम ने राज्य आंदोलन कार्यों के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज में मुफ्त उपचार, उद्योग धंधों में राज्य आंदोलनकारियों और उनके परिजनों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने की घोषणा की गई, इसके साथ ही क्षैतिज आरक्षण के मामले पर भी सीएम ने हाईकोर्ट में ठोस पैरवी करने का एलान किया. 

आंदोलन की चिंगारी दूर तक फैल गई
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वो एक ऐसा दौर था जिसके बाद आंदोलन की चिंगारी दूर तक फैल गई. तब राज्य का शायद ही कोई ऐसा इलाका होगा जहां आंदोलन ना चला हो. उसी का नतीजा रहा कि सरकारों को भी अलग राज्य के बारे में गंभीरता से विचार करना पड़ा और 9 नवंबर 2000 को कई शहादतों  के बाद अलग राज्य बनने से आंदोलन पर विराम लगा. 

ये भी पढ़ें:  

UP Politics: गांधी जयंती के मौके पर भाजपा और कांग्रेस पर भड़के अखिलेश यादव, बोले- जनता बनाएगी ‘कार्टून’

UP Police Alankaran Samaroh: आईपीएस लक्ष्मी सिंह ने घर-घर तक पहुंचाया ‘मिशन शक्ति’ अभियान, उत्कृष्ट सेवा मेडल से किया गया सम्मानित

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button