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दुनिया में सिर्फ 2 लोगों को ही हुई है ये दुर्लभ बीमारी, अमेरिका के बाद लखनऊ में मिली दूसरी मरीज

Lucknow Second Patient of Aplastic Anemia: केजीएमयू (KGMU) में दुर्लभ बीमारी रॉबर्टसोनियन ट्रांसलोकेशन (Robertsonian Translocation) जनित एप्लास्टिक एनीमिया (Aplastic Anemia) से पीड़ित दुनिया की दूसरी मरीज सामने आई है. उसका इलाज केजीएमयू के हिमेटोलॉजी विभाग में किया जा रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि इस दुर्लभ बीमारी से पीड़ित 17 वर्षीय किशोरी हरदोई (Hardoi) की रहने वाली है. उसे मामूली समस्याओं के चलते परिवार के लोगों ने केजीएमयू में भर्ती कराया था, जहां जांच के दौरान इस दुर्लभ बीमारी का पता चला.

37 साल पहले अमेरिका में पाया गया था मरीज 
डॉक्टरों ने बताया कि किशोरी के अलावा इस दुर्लभ बीमारी का एक मरीज 37 साल पहले अमेरिका में पाया गया था. डॉक्टरों का कहना है कि हरदोई के किसान की 17 वर्षीय बेटी को अचानक कमजोरी महसूस हो रही थी. वो जरा भी चलती-फिरती थी तो थकान होने लगती थी. उसकी सांस फूलने लगती थी. वो पसीने से लथपथ हो जाती थी और कमजोर होकर बैठ जाती थी. कई बार किशोरी खड़े होने की भी स्थिति में नहीं रहती थी. परिवार के लोग उसे स्थानीय डॉक्टर के पास ले गए लेकिन कोई राहत नहीं मिली. 

डॉक्टर भी रह गए हैरान 
दिसंबर 2019 में परिवार के लोग किशोरी को केजीएमयू लेकर आए थे. यहां हिमेटोलॉजी विभाग में सीनियर रेजिडेंट रहे डॉक्टर भूपेंद्र सिंह ने किशोरी के खून की कई जांचे कराई जिसमें उसके एप्लास्टिक एनीमिया से पीड़ित होने की पुष्टि हुई. इसके कारणों का पता लगाने के लिए डॉक्टर भूपेंद्र ने जीनोम व क्रोमोसोम जांच कराई तो रॉबर्टसोनियन ट्रांसलोकेशन की पुष्टि हुई. दोनों बीमारी एक मरीज में देखकर डॉक्टर भी हैरान रह गए. आगे की जांचों में पाया गया कि रॉबर्टसोनियन ट्रांसलोकेशन के कारण मरीज में एप्लास्टिक एनीमिया की बीमारी हुई है. 

अमेरिकी चिकित्सकों से कर रहे हैं संपर्क 
डॉक्टर भूपेंद्र का कहना है कि रॉबर्टसोनियन ट्रांसलोकेशन जनित एप्लास्टिक एनीमिया एक ऐसी समस्या है जिसके दुनिया में अब तक सिर्फ 2 मरीज मिले हैं. पहला मरीज 1984 में अमेरिका के डॉक्टर पीटर नोबेल ने रिपोर्ट किया था. रॉबर्टसोनियन ट्रांसलोकेशन एप्लास्टिक एनीमिया कोई नई बीमारी नहीं है. यह अलग-अलग मरीजों में पाई जाती है लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि इस युवती में जेनेटिक बीमारी रॉबर्टसोनियन ट्रांसलोकेशन की वजह से एप्लास्टिक एनीमिया हुआ है. अब डॉक्टर इस दुर्लभ बीमारी के उपचार के लिए अमेरिकी चिकित्सकों से संपर्क कर रहे हैं.

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