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गोरखपुर में नदियों ने मचाही तबाही, नहीं मिल रही मदद, बाढ़ का पानी पीने को मजबूर हैं लोग

Gorakhpur Flood News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर (Gorakhpur) में राप्‍ती (Rapti), रोहिन (Rohin) और घाघरा (Ghaghra) नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. पूर्वी-दक्षिणी छोर पर गोर्रा स्थिर है, लेकिन अभी उसका रौद्र रूप कम नहीं हुआ है. आमी नदी ने भी खजनी शहर के दक्षिणी क्षेत्र में तबाही मचा रही है. यही वजह है कि ग्रामीणों को बंधे पर शरण लेनी पड़ रही है. ग्रामीणों (villagers) को बच्‍चों (children) और मवेशियों (Cattle) के साथ बंधे पर पूरी गृहस्‍थी के साथ आना पड़ा है.

गोर्रा और आमी नदी ने मचा रखी है तबाही  
गोरखपुर के चौरी चौरा तहसील के राजधानी और अमवा बांध पांच दिन पहले जब गोर्रा नदी के उफान से कटे, तो ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई. गांव और घर बाढ़ में डूब जाने के बाद से उन्‍हें बंधों पर शरण लेनी पड़ी है. गोरखपुर में राप्‍ती, रोहिन, घाघरा का पानी फिलहाल उतर रहा है. लेकिन, तीनों नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. गोर्रा और आमी नदी की तबाही का मंजर कम नहीं हुआ है.

ग्रामीणों ने बंधे पर ले रखी है शरण   
पिण्‍डरा में गोर्रा नदी खतरे के निशान 70.50 से 1.65 आरएल मीटर ऊपर 72.150 आरएल मीटर पर बह रही है. गोर्रा के वेग से चौरी चौरा तहसील के झंगहा ब्‍लॉक में चार दिन पहले जोगिया के राजधानी और अमवा बंधे के कटने से एक दर्जन से अधिक गांव के ग्रामीणों को बंधे पर शरण लेनी पड़ी है. उनवलिया के रहने वाली रामसखी बताती हैं कि 8 दिनों से उन्होंने बंधे पर शरण ले रखी हैं. कुसुमा भी मवेशियों को लेकर बंधे पर हैं. पचुई का भरा-पूरा 8 लोगों का परिवार है, उन्होंने भी बंधे पर शरण ले रखी हैं. उन्‍होंने बताया कि कभी ऐसी बाढ़ नहीं देखी थी.

नहीं मिल रही है मदद 
राजमन बताते हैं कि चार दिन से बंधे पर हैं, कोई अभी तक झांकने नहीं आया है. प्रशासन की ओर से एक पैसे की भी मदद नहीं मिली है. सुकुना देवी के चार बेटे हैं. 8 दिन में कोई मदद नहीं मिली है, यो लोग बहुत परेशान हैं. कोई भी अधिकारी यहां पर ध्‍यान देने नहीं आया है. बाढ़ का पानी पीना पड़ रहा है. पानी की भी कोई व्‍यवस्‍था नहीं हो पा रही है. चार बहुओं को लेकर बंधे पर रुकना पड़ रहा है.

लोग बेघर हो गए हैं 
शहर के दक्षिणी क्षेत्र की खजनी तहसील में आमी नदी ने कहर बरपा रखा है. आमी के ऊफान से भी दर्जनों गांव के लोग बेघर हो गए हैं. आमी के कहर से खजनी तहसील के महुआडाबर, चपरहट, उनवल जरलही कोठा के लोगों को गांव से पलायन करना पड़ा है. यहां की रहने वाली नेहा बताती हैं कि गांव में स्थिति बहुत खराब है. बाढ़ आने की वजह से आने-जाने की दिक्‍कत है. हर जगह पानी पहुंच गया है. राजमति देवी कहती हैं कि बहुत परेशानी हो रही है. सरकार की ओर से कोई मदद नहीं मिल पाई है. दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है.

354 गांव बाढ़ से घिरे हैं
गोरखपुर में 354 गांव बाढ़ से घिरे हैं. 2,50,733 की जनसंख्‍या प्रभावित है. 44,270 हेक्‍टेयर क्षेत्रफल प्रभावित है. इसमें सदर के 76, कैंपियरगंज में 59, सहजनवां में 38, चौरी चौरा में 28, गोला में 75, बांसगांव में 45, खजनी में 33 गांव बाढ़ से घिर गए हैं. रोहिन और राप्‍ती नदी की बाढ़ से घिरे गांव में छोटी-बड़ी कुल 466 नावों को राहत के लिए लगाया गया है. इसमें सर्वाधिक सदर में 165, सहजनवां में 29, कैंपियरगंज में 69, गोला में 80, बांसगांव में 30, चौरी चौरा में 48 और खजनी में 45 नाव लगी हैं.

मेडिकल टीमों को किया गया है तैनात  
276 मेडिकल टीमें लोगों का इलाज कर रही हैं. अब तक 16,510 लोगों का उपचार हुआ है. क्लोरीन की  कुल 1,58,3810 गोलियां उपलब्‍ध कराई गई हैं. कुल 18,095 ओआरएस पैकेट बांटे जा चुके हैं. इसके अलावा कुल 33,800 राशन किट का वितरण किया गया है. एनडीआरएफ और आरआरसी की दो यूनिट और एसडीआरएफ की एक यूनिट को तैनात किया गया है. राप्‍ती नदी में बर्डघाट में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. 

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