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मसूरी गोलीकांड की 27वीं बरसी, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि

Mussoorie Shooting Anniversary: मसूरी गोलीकांड (Mussoorie Shooting) की आज 27वीं बरसी है. जिसके चलते आज मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने मसूरी (Mussoorie) पहुंचकर गोलीकांड में शहीद हुए शहीदों (Martyrs) को नमन कर श्रद्धांजलि दी. सीएम धामी ने शहीदों के परिजनों के साथ बातचीत भी की. सीएम पुष्कर सिंह धामी ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार सैनिक और उनके परिवारों के प्रति संवेदनशील है. जो भी मदद होगी वो सरकार करेगी साथ ही सैनिकों के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा. 

अलग राज्य की मांग को लेकर था आंदोलन 
बता दें कि, 1994 में उत्तराखंड राज्य के अलग होने की मांग को लेकर आंदोलन था. जिसके बाद खटीमा और मसूरी में पुलिस की बर्बरता के कारण कई लोगों की जान चली गई थी. कल खटीमा गोलीकांड की बरसी थी और आज मसूरी गोलीकांड की बरसी है. अपनों को खो चुके लोग भी इस कार्यक्रम में पहुंचे थे. शहीदों के परिजनों का मानना है की आज 2 सितंबर का दिन उत्तराखंड में काले दिन के रूप में जाना जाता है. इसके साथ ही कुछ लोग ये भी मानते हैं कि जो सपने संजोकर शहीदों ने आंदोलन किया था उस तरीके का उत्तराखंड अब नहीं है.

आंदोलनकारियों के सपनों को पूरा करेंगे
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मसूरी में शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीद राज्य आंदोलनकारियों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए मसूरी गोलीकांड में बेलमती चौहान, हंसा धनई, बलवीर सिंह नेगी, धनपत सिंह, मदन मोहन ममगाई, राय सिंह बंगारी ने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. मुख्यमंत्री ने कहा कि आंदोलनकारियों के बलिदान के कारण ही हमें उत्तराखंड राज्य मिला. उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने जिस उद्देश्य से अलग राज्य की मांग की थी, उसके अनुरूप ही राज्य को आगे बढ़ाया जाएगा. जन समस्याओं का समाधान तेजी से हो, इसके लिए हर स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है. कार्यों में तेजी लाने के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाया जा रहा है. जन सुविधा के लिए सरकार का ध्यान प्रक्रियाओं के सरलीकरण, समाधान और निस्तारण पर है. अधिकारियों को विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं. 

सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी 
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जो राज्य आंदोलनकारी चिन्हीकरण में छूट गए हैं, 31 दिसम्बर 2021 तक उन राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की व्यवस्था की जाएगी. चिन्हित राज्य आंदोलनकारियों, जिन्हें 3100 रुपये प्रतिमाह पेंशन अनुमन्य की गई है, उनकी मृत्यु के पश्चात उनके आश्रितों को भी 3100 रुपये प्रतिमाह पेंशन दी जाएगी. विभिन्न विभागों में कार्यरत राज्य आंदोलनकारियों को सेवा से हटाए जाने के माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर राज्य सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल कर ठोस पैरवी करेगी. उद्योगों में नौकरी के लिए भी राज्य आंदोलनकारियों को प्राथमिकता के लिए समुचित व्यवस्था की जाएगी. राजकीय अस्पतालों की तरह मेडिकल कॉलेजों में भी राज्य आंदोलनकारियों का निशुल्क इलाज किया जाएगा.

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